राजनीति और स्मार्ट सिटीजन
आज एक परिचित श्री के डी शर्मा जी ने एक व्यंग्य भेजा, जो आपसे साझा कर रहा हूं, उसके बाद अपनी बात रखूंगा।
व्यंग्य है :
❗जन प्रतिनिधि व्यापार❗
कुछ वर्षों से चुने हुए जन प्रतिनिधियों के खरीद फरोख्त का बाज़ार बहुत ही गर्म है।
जब देखता हूँ इसका इतना बड़ा पैमाना,
तो बहुत ही उचित लगता है इसको क़ानूनी जामा पहनाना।
मुझे लगता है इसके लिए सरकार कोई निश्चित कदम उठाए और इसे अर्थव्यवस्था के बड़े हाशिये पर लाए।
इसके लिए ज़रूरी है कि संविधान में आमूलचूल संशोधन किया जाए और एक ‘जन प्रतिनिधि बाज़ार’ बिल पारित किया जाए।
चुने हुए जन प्रतिनिधियों को ‘कमोडिटी’ या राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया जाए।
शुरू में सांसदों और विधायकों को ही इसकी परिभाषा में लाया जाए।
धीरे-धीरे कमोडिटी एक्सचेंज की तर्ज पर इसका विकास किया जाए।
जब विकसित होने लगे यह बाज़ार, तब ऊपर से नीचे ग्राम सरपंच की पायदान तक पहुँचा जाए।
इस एक्सचेंज में चुने हुए जन प्रतिनिधियों की लिस्टिंग की जाए।
अधिकाधिक आपराधिक मामलों व अंदाजित अघोषित संपत्ति वालों को प्रीमियम लिस्टिंग प्राइस से सम्मानित किया जाए।
इस तरह एक नई और सुदृढ़ आर्थिक व्यवस्था उभर कर आएगी और माँ भारती इनके मूल्यों पर नौ-नौ आँसू बहाएगी।
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प्रासंगिक होने के कारण यह मुझे बहुत पसंद आया, उम्मीद है आपको भी अच्छा लगा होगा। कुछ दिनों से राजनीति के माहौल में जी रहा हूं तो लग रहा है कि सत्ता पाने के लिए लोग क्या क्या नहीं करते। धन, बल, समय, ऊर्जा का निवेश कर सत्ता पाने के बाद मुनाफा कमाने को राजनीति में गलत नही माना जाता, हालांकि नैतिकता के विरुद्ध है, पर यही राज्य नीति मानी जाती है। फिर सत्ता में आने के बाद सरकारें कर्जे लेकर खर्च करते है, अब कितना कहां खर्च होता है, अभी वह चर्चा का विषय नहीं। लगभग सभी राज्यों और देश पर काफी अधिक कर्ज है, जो गंभीर मुद्दा है। फाइनेंस में एमबीए हूं, अर्थशास्त्र की समझ होने के कारण मैं इतना जानता हूं अगर आमदनी से अधिक खर्च रहेगा तो भविष्य अच्छा नहीं रहेगा, चाहे परिवार हो, कम्पनी हो या राज्य देश हो। शायद इसीलिए अमीर लोग देश छोड़कर जा रहे है, शायद उनको भविष्य का अंदाजा लग गया है। इसलिए यह एक gap है, problem है। बिजनेस जगत में gap या प्रोब्लम को अवसर माना जाता है, ताकि gap/प्रोब्लम का समाधान/उत्पाद/सेवा का आविष्कार हो और जिसे बिजनेस प्रॉफिट में बदल सके। बिजनेस चलाने के लिए मैनेजमेंट होता है जो आय को बढ़ाने और खर्च कम करने का प्रयास करता है और मुनाफे और ग्राहक संतुष्टि को बढ़ाने का प्रयास करता है।
यह हम स्मार्ट सिटीजन की जिम्मेदारी है खासकर उस व्यवसायी वर्ग की जो देश और राज्य को मुनाफे में लाने के लिए विचार दे सके और सोशल मीडिया पर शेयर कर जन प्रतिनिधियों पर दबाव डाले ताकि हमारा देश फिर से विदेशियों के लिए निवेश का केंद्र बन सके और देश/राज्य पर लगे कर्ज को हटा सके। कुछ छोटे विचार मेरे मन में आये, जिस पर विचार और काम कर के देश की बेरोजगारी और महंगाई पर नियंत्रण किया जा सकता है।
👉 बेरोजगारी की वजह होती है पर्याप्त काम की कमी और महंगाई की वजह होती है वस्तुओ की सप्लाई से अधिक डिमांड। सर्वाधिक मांग खाद्य पदार्थो की होती है। अगर ऐसी योजना या नीति बन सके जो बेरोजगार युवकों को खाद्य पदार्थो की सप्लाई बढ़ाने में लगा सके जैसे खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर निर्यात योग्य और अधिक डिमांड वाली फसल उगा सके।
👉रियल एस्टेट क्षेत्र लेबर की कमी से जूझ रहा है, अगर उस क्षेत्र में स्किल्ड लेबर की सप्लाई बढ़े तो निर्माण लागत में कमी आ सकती है, जिससे महंगाई कम होगी।
👉इजराइल में 90% घरों में सोलर ऊर्जा है। हमारे देश/राज्य सरकारों को अग्रेसिव होकर इस क्षेत्र में काम करे तो बिजली की कटौती और महंगी दरों की समस्या से निजात मिल सकती है। नए घरेलू छोटे विंड टरबाइन भी काफी बिजली का निर्माण करते है। ऊर्जा नीति में बदलाव और अच्छी ईमानदार नियत से यह संभव है।
👉 जिस प्रकार लिस्टेड कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर शेयर की कीमतों में उछाल और गिरावट होती है, अगर इसी विचार पर सरकारों का भी स्टॉक हो और निष्पक्ष सूचकांक हो और उसमे निवेश करने का विकल्प हो तो लोग अच्छी सरकारों में निवेश करेंगे और बुरी सरकारों के लिए अगला चुनाव हारने का खतरा रहेगा। जन प्रतिनिधियों की रेटिंग हो तो सोने पे सुहागा।
हालांकि यह विचार अभी अजीब और असंभव लग सकता है, लेकिन ऐसी कई असंभव चीजे इतिहास में संभव हुई है।
अगर आपके मन में भी कोई विचार हो तो साझा करे ताकि हम कुछ प्रयास कर देश की प्रगति में योगदान कर सके। अगर इस ब्लॉग पर आपके कोई विचार हो तो भी अवगत कराए।
आभार
रमेश टेहलानी
सुझाव सही हैं । धन्यवाद।
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