गुरुवार, 7 जुलाई 2022

अजमेर : सिटी ऑफ स्मार्ट सिटीजंस ( 26 June 2022)

अजमेर : सिटी ऑफ स्मार्ट सिटीजंस
क्या आप चाहते है अजमेर स्मार्ट सिटी बने❓अगर हां तो यह ब्लॉग जरूर पढ़े‼️

साल 2015 में भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 शहरो को साल 2022 तक स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की थी। इन सौ शहरो में अजमेर का भी नाम सुन कर दिल गार्डन गार्डन हो गया था। रोज सुबह व्हाट्सएप पर कई गुड मॉर्निंग और सकारात्मक सोच वाले मैसेज आते है और कभी कभार पढ़ भी लेते है और दिल दिमाग को पॉजिटिव रहने के लिए आदेश (निवेदन) करते है। उसी पॉजिटिव सोच ने उम्मीद बंधाई थी कि साल 2022 यानी इसी साल में हमारा अजमेर स्मार्ट सिटी बन जायेगा। अब पाठको को शायद लगे कि ऑप्टिमिस्टिक (आशावादी) होने की बजाय रियलिस्टिक ( यथार्थवादी) होना जरूरी है। 

इस ब्लॉग का उद्देश्य प्रशासन को कोसना नही है और ना कि सरकारों के झूठे वादों और झुमलो पर कटाक्ष करना है। मेरे मन में एक सकारात्मक व्यवस्था परिवर्तन का विचार आया और सोचा आप लोगो के साथ साझा करू ताकि कुछ सकारात्मक व्यवस्था परिवर्तन की ओर अग्रसर हो सके। 

मेरी जानकारी के अनुसार अजमेर ब्रेन ड्रेन ( प्रतिभा पलायन) का सबसे बड़ा उदाहरण है। अजमेर का नाम शिक्षा के क्षेत्र में काफी बड़ा है और अजमेर से पढ़े छात्र दुनिया भर में सफलता के झंडे गाड़ रहे है। इसके अतिरिक्त अजमेर में सिंधी समाज से कई लोग विदेशो में सफ़लता पूर्वक काम करते है। अजमेर की जनसंख्या में लगभग 22% सिंधी है और कहा जाता है कि हर घर से एक एनआरआई है। ये सफल अजमेरी और एनआरआई अधिकतम निवेश अपने अजमेर में करते है और पिछले कुछ साल से उम्मीद करते हैं कि अजमेर स्मार्ट सिटी बनेगा और हम अजमेर में रिटायर जीवन गुजार सकेंगे। 
पर दुख की बात है इतना अच्छा शिक्षा और धन निवेश का केंद्र होने के बाद भी अजमेर उतना स्मार्ट नही बना जितना बेहतर कोटा और उदयपुर बन गए।  

कुछ दिन पहले इन्ही विचारो के कारवां ने एक विचार कौंधा कि क्या अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाना सरकार या प्रशासन अकेले की जिम्मेदारी है! या हम नागरिकों का भी कोई कर्तव्य / जिम्मेदारी है !! इंटरनेट पर घूमा तो पाया कि स्मार्ट सिटी के लिए प्रशासन और नागरिक दोनो जिम्मेदार है। अब प्रशासन/सरकार से उम्मीद रखने की बजाय क्या हम सिटीजन अजमेर को स्मार्ट सिटी नही बना सकते ?? 

इस ब्लॉग के माध्यम से मैं अजमेर के जागरूक और प्रगतिशील सिटीजन से अनुरोध करना चाहूंगा कि कम से कम हम नागरिक तो अपना योगदान दे। अब सवाल उठता है कि हम सिटीजन कैसे अजमेर को स्मार्ट सिटी बना सकते है? इसके लिए मैंने जानकारी जुटाने का प्रयास किया है। सबसे पहले यह जानते है कि स्मार्ट सिटी होता क्या है। गूगल भाई ने विकिपीडिया के हिंदी रूपांतरण में बताया कि 
"एक स्मार्ट सिटी एक तकनीकी रूप से आधुनिक शहरी क्षेत्र है जो विशिष्ट डेटा एकत्र करने के लिए विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक तरीकों, आवाज सक्रियण विधियों और सेंसर का उपयोग करता है । उस डेटा से प्राप्त जानकारी का उपयोग संपत्तियों, संसाधनों और सेवाओं को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने के लिए किया जाता है; बदले में, उस डेटा का उपयोग पूरे शहर में परिचालन को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। इसमें नागरिकों, उपकरणों, इमारतों और संपत्तियों से एकत्र किया गया डेटा शामिल है जिसे यातायात और परिवहन प्रणालियों, बिजली संयंत्रों, उपयोगिताओं, जल आपूर्ति नेटवर्क, अपशिष्ट, अपराध का पता लगाने, उनकी निगरानी और प्रबंधन के लिए संसाधित और विश्लेषण किया जाता है।"

संक्षेप में कहें तो "बेहतर यातायात, जल-विद्युत-सफाई व्यवस्था वाला शहर"

इस व्यवस्था में हम सिटीजन इस प्रकार योगदान कर सकते है: 
👉 सफाई/स्वच्छता : नागरिक निर्धारित स्थान के अलावा कहीं भी कचरा न फेंके, ना थूंके। अन्य नागरिकों को सफाई रखने हेतु प्रोत्साहित करे। अपने अपने पार्षद को गंदगी के बारे में व्हाट्सअप करे और फोटो भेजे। आजकल हर क्षेत्र के मुख्य स्थान पर पार्षद के नंबर लिखे हुए है। 

👉 यातायात के नियमो का पालन करे। वाहन निर्धारित स्थान पर पार्क करे। बेवजह हॉर्न न बजाए। हाईवे पर निर्धारित लाइन में निर्धारित गति से वाहन चलाए। 

👉 टूटी हुई सड़को के लिए प्रशासन का इंतजार करने की बजाय आसपास के लोग प्रति व्यक्ति 100-200 रुपए इकट्ठा कर सीमेंट से पेचवर्क कराए। इस कार्य में असुविधा हो तो मुझसे संपर्क करे। 

👉 जल संरक्षण करे। जल हैं तो कल है। नए घर के निर्माण के समय वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए। कुछ पैसा अधिक लगेगा लेकिन भविष्य में कई गुना पैसा बचेगा। 

👉 संभव हो तो सोलर पैनल लगाए। बैंक में एफडी करवाने से बेहतर है सोलर पैनल लगाए और एफडी के ब्याज से ज्यादा पैसे बचाएं। 

👉 किसी अनुभवी प्रबुद्ध व्यक्ति ने बताया कि आवारा पशुओं को गलियों में रोटी और चारा देने के बजाय गऊशाला में दान करे। शहर में आवारा कुत्ते, गाय और बंदर कम हो जायेंगे। 

📌 अगर आपके पास भी और कोई सुझाव हो तो कृपया शेयर करे। उसे सबके साथ साझा करने का प्रयास करेंगे। ये छोटे छोटे प्रयास बड़े परिणाम देंगे। मैने जापान और जर्मनी के बारे में अध्ययन किया तो यही पाया कि शहरो के स्मार्ट होने में सिटीजन का योगदान अधिक होता है। सरकार और कुछ नही, हम नागरिकों का प्रतिनिधित्व मात्र है। जैसे हम नागरिक होंगे, वैसी सरकार होगी। हम सिर्फ अपनी अपनी जिम्मेदारी समझ कर छोटे छोटे प्रयास करे तो हमारे अजमेर को स्मार्ट सिटी जल्द बनाया जा सकता है। 

आपके सुझाव और विचार आमंत्रित है, जो अजमेर को स्मार्ट सिटी और बेहतर बनाने में मदद करे। अगर यह मैसेज सार्थक लगे तो आगे जरूर फॉरवर्ड करे। 

आभार
रमेश टेहलानी 
अजमेर सिटीजन

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