जो शब्द "रजिस्ट्री" प्रयोग हुआ है, तकनीकी रूप से इस नाम का कोई दस्तावेज़ (लेख पत्र) नहीं होता है।
जहां तक मेरी जानकारी है, लोग आम बोलचाल की भाषा में किसी अचल संपत्ति से संबंधित लेख पत्र/ विक्रय पत्र को रजिस्ट्री बोलते हैं।
यदि आपका तात्पर्य प्लॉट से संबंधित इसी लेखपत्र से है तो अब आते हैं आपकी मूल समस्या पर कि क्या किसी प्लॉट का विक्रय पत्र( रजिस्ट्री) फर्जी तो नहीं है???…..
प्लॉट या किसी भी अचल संपत्ति के मूल विलेख(विक्रय पत्र) की सत्यता का पता लगाना बहुत आसान है।
सबसे पहले मैं ये बता दूं कि भारत वर्ष में प्रत्येक अचल संपत्ति के स्वामित्व का रिकॉर्ड सरकारी विभाग में विधिवत रखा जाता है।
यदि आपको किसी प्लॉट या अन्य स्थावर संपत्ति के स्वामित्व से संबंधित विलेख (विक्रय पत्र इत्यादि) की सत्यता की जांच करनी है तो आपको उस सरकारी विभाग में संपर्क करना होगा जिसके क्षेत्राधिकार में वह प्लॉट/ संपत्ति है।
इसके लिए राज्यों में अलग अलग नामों से सरकारी कार्यालय होते हैं। अधिकतर राज्यों में "उप-निबंधन" या। "उप-पंजीयन" कार्यालय में इस प्रकार के कार्य होते हैं तथा उन्ही कार्यालयों में प्लॉट आदि संपत्तियों के निबंधित विलेख सुरक्षित रखे जाते हैं।
प्लॉट से संबंधित निबंधित-विलेख (रजिस्ट्री) की सत्यता जांचने के लिए आपको कथित प्लॉट से संबंधित उप निबंधन / उप पंजीयन कार्यालय में उपस्थित होकर प्लॉट के लेखपत्र (रजिस्ट्री) की सत्यता की खोज हेतु उचित स्टांप / शुल्क के साथ प्रार्थना पत्र देना होगा। आपको प्रार्थित दस्तावेज जांच हेतु उपलब्ध करा दिए जायेंगे जहां आप स्वयं कथित लेखपत्र (रजिस्ट्री) की सत्यता जांच सकते हैं।
आपके द्वारा उपलब्ध विवरण के अनुसार यदि उस संपत्ति का कोई दस्तावेज़ उप निबंधन कार्यालय में नहीं पाया जाता तो फिर आप समझ सकते हैं कि प्लॉट से संबंधित रजिस्ट्री फर्ज़ी है।
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