सदियों से रोटी कपड़ा और मकान को आधारभूत आवश्यकता माना गया है और वर्तमान में अधिकतर लोगो की सबसे महंगी खरीद उसका घर या अचल सम्पत्ति होता है। अचल सम्पत्ति के साथ कई भावनाएं और संभावनाएं जुड़ी होती है। जीवन के सबसे बड़े निर्णय और महंगे सौदे में कई जटिल प्रक्रियाएं होती है और कई सालो से इस क्षेत्र में बेहतरी के लिए कई नियम, कानून, व्यवस्थाये और नई तकनीकें विकसित हो रही है।
आज कृषि के बाद अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक योगदान दायक क्षेत्र होने के बाद भी यह क्षेत्र काफी हद तक अव्यवस्थित है। इतने नियम कानून, विकास और तकनीक के होने के बावजूद आज भी इस क्षेत्र में फर्जीवाड़ा होना नई बात नही है। रियल एस्टेट सौदों में एस्टेट एजेंट की भूमिका भी महत्त्वपूर्ण होती है। बतौर रियल एस्टेट एजेंट मुझे 13 से अधिक वर्ष के अनुभव के बाद महसूस हुआ कि विकास की इसी प्रक्रिया में भारत में आज भी इस क्षेत्र में कई सुधारो की आवश्यकता है।
भविष्य में भारत की रियल एस्टेट ब्रोकिंग इंडस्ट्री को सुधारने और मानकीकरण (standardization) करने की सख्त जरूरत है। विकसित देशों में बतौर रियल एस्टेट एजेंट काम करने के लिए ट्रेनिंग, परीक्षा और लाइसेंस लेने की प्रक्रिया है, जैसे भारत में बीमा, म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के लिए होती है।
अनुभव के आधार पर मेरे कुछ सुझाव और विचार है, जिन पर अगर सरकार कदम उठाए तो भारत में रीयल एस्टेट क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन, सेक्टर में गुणवत्ता और अधिक पारदर्शिता लाई जा सकती हैं।
1. एक RERA और एक पंजीकरण:
एक राष्ट्र, एक RERA और एक पंजीकरण का सुझाव सभी रियल एस्टेट संबंधित व्यक्तियों और संगठनों को एक ही छत के नीचे लाने के लिए है। इससे एक मानकीकरण प्राप्त किया जा सकता है, जैसे कि पूंजी बाजार को सेबी के द्वारा प्रबंधित किया जाता है। वर्तमान में हर राज्य का अलग अलग RERA होने के कारण मानक प्रक्रिया का अभाव है।
2. प्रशिक्षण का अनिवार्य बनाएं:
क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के लिए प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाने के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सभी श्रेणियों के लोग रीयल एस्टेट क्षेत्र में काम करने के लिए तैयार होते हैं, जैसे कि प्राइमरी सेल एजेंट, रीसेल एजेंट, रेंटल - लीजिंग ब्रोकर, बिल्डर, डेवलपर, उसके के कर्मचारी, प्राधिकरण और निगम के अधिकारी और कर्मचारी इत्यादि। प्रोपर्टी की सही वैल्यूएशन करने की जानकारी और कानूनी दस्तावेज को जांचने की सही प्रक्रिया की जानकारी होना इस क्षेत्र में हर काम करने वाले के लिए अनिवार्य होनी चाहिए।
3. मानक दस्तावेज़ (Standard Documents)और भुगतान :
मानक दस्तावेज़ और समझौतों को तैयार करने के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सम्पत्ति निर्माण या विकास के विचार से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने तक की प्रक्रिया निश्चित हो ताकि क्षेत्र की जटिलता कम हो सके। ब्रोकरेज दरों को स्थिर करें और ब्रोकरेज के लिए न्यूनतम और अधिकतम ब्रैकेट को निश्चित करें।
4. ग्राहक जागरूकता का प्रबंधन:
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की तरह रियल एस्टेट क्षेत्र में भी ग्राहकों को नियमों और विनियमों, शुल्कों, ब्रोकरेज की जानकारी देने के लिए कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए, ताकि आधारभूत जरूरत वाली सम्पत्ति से संबन्धित जागरूकता पैदा हो।
भारत में महाराष्ट्र पहला राज्य है जिसने RERA (Real Estate Regulatory Authority) के माध्यम से इस क्षेत्र में कदम उठाया है और अन्य नियामकों की तरह रियल एस्टेट एजेंट के लिए प्रशिक्षण, परीक्षा और लाइसेंस को अनिवार्य किया है। इस कदम को भारत के अन्य राज्यों के प्राधिकरणों द्वारा भी अपनाया जाना चाहिए, जब तक एक RERA संभव हो।
इन कदमों के माध्यम से, रियल एस्टेट सेक्टर को और भी उन्नत और सुधारा जा सकता है, और लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास की ओर बढ़ावा दिलाया जा सकता है। एक सशक्त और सुधारा हुआ रीयल एस्टेट सेक्टर भविष्य के विकसित भारत की जरूरत है।
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